वाल्मीकि रामायण 2.2.14
अनेन श्रेयसा सद्यः सम्योज्यैवमिमां महीम् ।गतक्लेशो भविष्यामि सुते तस्मिन्निवेश्य वै॥
anena śreyasā sadyaḥ samyojyaivamimāṃ mahīm |gatakleśo bhaviṣyāmi sute tasminniveśya vai ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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