वाल्मीकि रामायण 2.2.23
इति तद्वचनं श्रुत्वा राजा तेषां मनःप्रियम् ।अजानन्निव जिजञासुरिदं वचनमब्रवीत्॥
iti tadvacanaṃ śrutvā rājā teṣāṃ manaḥpriyam |ajānanniva jijañāsuridaṃ vacanamabravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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