वाल्मीकि रामायण 2.2.34
देवासुरमनुष्याणां सर्वास्त्रेषु विशारदः ।सम्यग्विद्याव्रतस्नातो यथवत्साङ्गवेदवित्॥
devāsuramanuṣyāṇāṃ sarvāstreṣu viśāradaḥ |samyagvidyāvratasnāto yathavatsāṅgavedavit ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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