वाल्मीकि रामायण 2.2.38
पौरान् स्वजनवन्नित्यम् कुशलं परिपृच्छति ।पुत्रेष्वग्निषु दारेषु प्रेष्यशिष्यगणेषु च॥
paurān svajanavannityam kuśalaṃ paripṛcchati |putreṣvagniṣu dāreṣu preṣyaśiṣyagaṇeṣu ca ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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