वाल्मीकि रामायण 2.21.25
त्वद् वियोगान् न मे कार्यम् जीवितेन सुखेन वा ।त्वया सह मम श्रेयः तृणानाम् अपि भक्षणम्॥
tvad viyogān na me kāryam jīvitena sukhena vā |tvayā saha mama śreyaḥ tṛṇānām api bhakṣaṇam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें