वाल्मीकि रामायण 2.21.2
न रोचते मम अपि एतत् आर्ये यद् राघवो वनम् ।त्यक्त्वा राज्य श्रियम् गच्चेत् स्त्रिया वाक्य वशम् गतः॥
na rocate mama api etat ārye yad rāghavo vanam |tyaktvā rājya śriyam gaccet striyā vākya vaśam gataḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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