वाल्मीकि रामायण 2.21.43
तत् एनाम् विसृज अनार्याम् क्षत्र धर्म आश्रिताम् मतिम् ।धर्मम् आश्रय मा तैक्ष्ण्यम् मद् बुद्धिर् अनुगम्यताम्॥
tat enām visṛja anāryām kṣatra dharma āśritām matim |dharmam āśraya mā taikṣṇyam mad buddhir anugamyatām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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