वाल्मीकि रामायण 2.21.47
शोकस्सम्धार्यताम् मातर्हृदये साधु मा शुचः ।वनवासादिहैष्यामि पुनः कृत्वा पितुर्वचः॥
śokassamdhāryatām mātarhṛdaye sādhu mā śucaḥ |vanavāsādihaiṣyāmi punaḥ kṛtvā piturvacaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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