वाल्मीकि रामायण 2.22.29
मा च लक्ष्मण सम्तापम् कार्षीर्लक्ष्म्या विपर्यये ।राज्यम् वा वनवासो वा वनवासो महोदयः॥
mā ca lakṣmaṇa samtāpam kārṣīrlakṣmyā viparyaye |rājyam vā vanavāso vā vanavāso mahodayaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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