वाल्मीकि रामायण 2.24.7
चिन्ताबाष्पमहाधूस्तवागमनचिन्तजः ।कर्शयित्वा भृशम् पुत्र निश्वासायाससम्भवः॥
cintābāṣpamahādhūstavāgamanacintajaḥ |karśayitvā bhṛśam putra niśvāsāyāsasambhavaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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