वाल्मीकि रामायण 2.25.2
न शक्यसे वारयौइतुम् गच्छेदानीम् रघुत्तम ।श्रीघ्रम् च विनिवर्तस्व वर्तस्व च सताम् क्रमे॥
na śakyase vārayauitum gacchedānīm raghuttama |śrīghram ca vinivartasva vartasva ca satām krame ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें