वाल्मीकि रामायण 2.26.32
वन्दितव्याः च ते नित्यम् याः शेषा मम मातरः ।स्नेह प्रणय सम्भोगैः समा हि मम मातरः॥
vanditavyāḥ ca te nityam yāḥ śeṣā mama mātaraḥ |sneha praṇaya sambhogaiḥ samā hi mama mātaraḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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