वाल्मीकि रामायण 2.26.4
देव कार्यम् स्म सा कृत्वा कृतज्ञा हृष्ट चेतना ।अभिज्ञा राज धर्मानाम् राज पुत्रम् प्रतीक्षते॥
deva kāryam sma sā kṛtvā kṛtajñā hṛṣṭa cetanā |abhijñā rāja dharmānām rāja putram pratīkṣate ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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