वाल्मीकि रामायण 2.26.7
ताम् दृष्ट्वा स हि धर्मात्मा न शशाक मनोगतम् ।तम् शोकम् राघवह् सोढुम् ततो विवृतताम् गतः॥
tām dṛṣṭvā sa hi dharmātmā na śaśāka manogatam |tam śokam rāghavah soḍhum tato vivṛtatām gataḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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