वाल्मीकि रामायण 2.27.1
एवम् उक्ता तु वैदेही प्रिय अर्हा प्रिय वादिनी ।प्रणयात् एव सम्क्रुद्धा भर्तारम् इदम् अब्रवीत्॥
evam uktā tu vaidehī priya arhā priya vādinī |praṇayāt eva samkruddhā bhartāram idam abravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें