वाल्मीकि रामायण 2.27.15
फल मूल अशना नित्यम् भविष्यामि न सम्शयः ।न ते दुह्खम् करिष्यामि निवसन्ती सह त्वया॥
phala mūla aśanā nityam bhaviṣyāmi na samśayaḥ |na te duhkham kariṣyāmi nivasantī saha tvayā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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