वाल्मीकि रामायण 2.29.15
कृत क्षणा अहम् भद्रम् ते गमनम् प्रति राघव ।वन वासस्य शूरस्य चर्या हि मम रोचते॥
kṛta kṣaṇā aham bhadram te gamanam prati rāghava |vana vāsasya śūrasya caryā hi mama rocate ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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