वाल्मीकि रामायण 2.29.4
अदृष्टपूर्वरूपत्वात्सर्वे ते तव राघव ।रूपम् दृष्ट्वापसर्पेयुर्भये सर्वे हि बिभ्यति॥
adṛṣṭapūrvarūpatvātsarve te tava rāghava |rūpam dṛṣṭvāpasarpeyurbhaye sarve hi bibhyati ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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