वाल्मीकि रामायण 2.3.45
तुष्टानुरक्तप्रकृतिर्यः पालयति मेदिनीम् ।तस्य नन्दन्ति मित्राणि लब्ध्वाऽमृतमिवाऽमराः॥
tuṣṭānuraktaprakṛtiryaḥ pālayati medinīm |tasya nandanti mitrāṇi labdhvā'mṛtamivā'marāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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