वाल्मीकि रामायण 2.3.7
तदद्य भगवन् सर्वमाज्ञापयितु मर्हसि ।तच्छ्रुत्वा भूमिपालस्य वसिष्ठो द्विजसत्तमः॥
tadadya bhagavan sarvamājñāpayitu marhasi |tacchrutvā bhūmipālasya vasiṣṭho dvijasattamaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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