वाल्मीकि रामायण 2.30.35
न सत्यम् दानमानौ वा न यज्ञाश्चाप्तदक्षिणाः ।तथा बलकराः सीते यथा सेवा पितुर्मता॥
na satyam dānamānau vā na yajñāścāptadakṣiṇāḥ |tathā balakarāḥ sīte yathā sevā piturmatā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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