वाल्मीकि रामायण 2.30.6
द्युमत्सेन सुतम् वीर सत्यवन्तम् अनुव्रताम् ।सावित्रीम् इव माम् विद्धि त्वम् आत्म वश वर्तिनीम्॥
dyumatsena sutam vīra satyavantam anuvratām |sāvitrīm iva mām viddhi tvam ātma vaśa vartinīm ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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