वाल्मीकि रामायण 2.31.15
तामार्याम् स्वयमेवेह राजाऽनुग्रहणेन वा ।सौमित्रे भर कौसल्या मुक्तमर्थमिमम् चर॥
tāmāryām svayameveha rājā'nugrahaṇena vā |saumitre bhara kausalyā muktamarthamimam cara ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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