वाल्मीकि रामायण 2.31.2
स भ्रातुश्चरणौ गाढम् निपीड्य रघुनन्दनः ।सीतामुवाचातियशाम् राघवम् च महाव्रतम्॥
sa bhrātuścaraṇau gāḍham nipīḍya raghunandanaḥ |sītāmuvācātiyaśām rāghavam ca mahāvratam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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