वाल्मीकि रामायण 2.31.3
यदि गन्तुम् कृता बुद्धिर्वनम् मृगगजायुतम् ।अहम् त्वानुगमिष्यामि वनमद्रे धनुर्धरः॥
yadi gantum kṛtā buddhirvanam mṛgagajāyutam |aham tvānugamiṣyāmi vanamadre dhanurdharaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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