वाल्मीकि रामायण 2.31.4
मया समेतोऽरण्यानि बहूनि विचरिष्यसि ।पक्षिभिर्मृगयूथैश्च सम्घुष्टानि समन्ततः॥
mayā sameto'raṇyāni bahūni vicariṣyasi |pakṣibhirmṛgayūthaiśca samghuṣṭāni samantataḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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