वाल्मीकि रामायण 2.33.6
यम् यान्तम् अनुयाति स्म चतुर् अन्ग बलम् महत् ।तम् एकम् सीतया सार्धम् अनुयाति स्म लक्ष्मणः॥
yam yāntam anuyāti sma catur anga balam mahat |tam ekam sītayā sārdham anuyāti sma lakṣmaṇaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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