वाल्मीकि रामायण 2.34.35
दुष्करम् क्रियते पुत्र सर्वथा राघव तया ।मत्प्रियार्थम् प्रियाम्स्त्यक्त्वा यद्यासि विजनम् वनम्॥
duṣkaram kriyate putra sarvathā rāghava tayā |matpriyārtham priyāmstyaktvā yadyāsi vijanam vanam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें