वाल्मीकि रामायण 2.34.6
अयम् स पुरुष व्याघ्र द्वारि तिष्ठति ते सुतः ।ब्राह्मणेभ्यो धनम् दत्त्वा सर्वम् चैव उपजीविनाम्॥
ayam sa puruṣa vyāghra dvāri tiṣṭhati te sutaḥ |brāhmaṇebhyo dhanam dattvā sarvam caiva upajīvinām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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