वाल्मीकि रामायण 2.35.28
सत्यश्चाद्य प्रवादोऽयम् लौकिकः प्रतिभाति मा ।पित्R^ऊन् समनुजायन्ते नरा मातरमङ्गनाः॥
satyaścādya pravādo'yam laukikaḥ pratibhāti mā |pitR^ūn samanujāyante narā mātaramaṅganāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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