वाल्मीकि रामायण 2.39.14
राजा सत्वरम् आहूय व्यापृतम् वित्त सम्चये ।उवाच देश कालज्ञो निश्चितम् सर्वतः शुचि॥
rājā satvaram āhūya vyāpṛtam vitta samcaye |uvāca deśa kālajño niścitam sarvataḥ śuci ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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