वाल्मीकि रामायण 2.4.4
प्रतिगृह्य स तद्वाक्यं सूतः पुनरुपाययौ ।रामस्य भवनं शीघ्रं राममानयितुं पुनः॥
pratigṛhya sa tadvākyaṃ sūtaḥ punarupāyayau |rāmasya bhavanaṃ śīghraṃ rāmamānayituṃ punaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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