वाल्मीकि रामायण 2.4.7
तमुवाच ततः सूतो राजा त्वां द्रष्टु मिच्छति ।श्रुत्वा प्रमाणमत्र त्वं गमनायेतराय वा॥
tamuvāca tataḥ sūto rājā tvāṃ draṣṭu micchati |śrutvā pramāṇamatra tvaṃ gamanāyetarāya vā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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