वाल्मीकि रामायण 2.40.28
अथ राजा वृतः स्त्रीभिर्दीनाभिर्दीनचेतनः ।निर्जगाम प्रियम् पुत्रम् द्रक्ष्यामि इति ब्रुवन् गृहात्॥
atha rājā vṛtaḥ strībhirdīnābhirdīnacetanaḥ |nirjagāma priyam putram drakṣyāmi iti bruvan gṛhāt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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