वाल्मीकि रामायण 2.42.30
तच् च दृष्ट्वा महा राजो भुजम् उद्यम्य वीर्यवान् ।उच्चैः स्वरेण चुक्रोश हा राघव जहासि माम्॥
tac ca dṛṣṭvā mahā rājo bhujam udyamya vīryavān |uccaiḥ svareṇa cukrośa hā rāghava jahāsi mām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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