वाल्मीकि रामायण 2.42.31
सुखिता बत तम् कालम् जीविष्यन्ति नर उत्तमाः ।परिष्वजन्तः ये रामम् द्रक्ष्यन्ति पुनर् आगतम्॥
sukhitā bata tam kālam jīviṣyanti nara uttamāḥ |pariṣvajantaḥ ye rāmam drakṣyanti punar āgatam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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