वाल्मीकि रामायण 2.42.32
अथ रात्र्याम् प्रपन्नायाम् कालरात्र्यामिआत्मनः ।अर्धरात्रे दशरथह् कौसल्यामिदमब्रवीत्॥
atha rātryām prapannāyām kālarātryāmiātmanaḥ |ardharātre daśarathah kausalyāmidamabravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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