वाल्मीकि रामायण 2.44.16
दैवतम् दैवतानाम् च भूतानाम् भूतसत्तमः ।तस्य केह्यगुणा देवि वने वा प्यथवा पुरे॥
daivatam daivatānām ca bhūtānām bhūtasattamaḥ |tasya kehyaguṇā devi vane vā pyathavā pure ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें