वाल्मीकि रामायण 2.46.22
अतः भूयो अपि न इदानीम् इक्ष्वाकु पुर वासिनः ।स्वपेयुर् अनुरक्ता माम् वृष्क मूलानि सम्श्रिताः॥
ataḥ bhūyo api na idānīm ikṣvāku pura vāsinaḥ |svapeyur anuraktā mām vṛṣka mūlāni samśritāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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