वाल्मीकि रामायण 2.46.28
तम् स्यन्दनमधिष्ठाय राघवः सपरिच्छदः ।शीघ्रगामाकुलावर्ताम् तमसामतरन्नदीम्॥
tam syandanamadhiṣṭhāya rāghavaḥ saparicchadaḥ |śīghragāmākulāvartām tamasāmatarannadīm ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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