वाल्मीकि रामायण 2.47.6
यो नः सदा पालयति पिता पुत्रानिवौरसान् ।कथम् रघूणाम् स श्रेष्ठस्त्यक्त्वा नो विपिनम् गतः॥
yo naḥ sadā pālayati pitā putrānivaurasān |katham raghūṇām sa śreṣṭhastyaktvā no vipinam gataḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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