वाल्मीकि रामायण 2.48.28
मिथ्या प्रव्राजितः रामः सभार्यः सह लक्ष्मणः ।भरते सम्निषृष्टाः स्मः सौनिके पशवो यथा॥
mithyā pravrājitaḥ rāmaḥ sabhāryaḥ saha lakṣmaṇaḥ |bharate samniṣṛṣṭāḥ smaḥ saunike paśavo yathā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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