वाल्मीकि रामायण 2.49.14
सूतैति एव च आभाष्य सारथिम् तम् अभीक्ष्णशः ।हम्स मत्त स्वरः श्रीमान् उवाच पुरुष ऋषभः॥
sūtaiti eva ca ābhāṣya sārathim tam abhīkṣṇaśaḥ |hamsa matta svaraḥ śrīmān uvāca puruṣa ṛṣabhaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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