वाल्मीकि रामायण 2.5.2
गच्छोपवासं काकुत्थ्सं कारयाद्य तपोधन ।श्रीयशोराज्यलाभाय वध्वा सह यतव्रतम्॥
gacchopavāsaṃ kākutthsaṃ kārayādya tapodhana |śrīyaśorājyalābhāya vadhvā saha yatavratam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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