वाल्मीकि रामायण 2.52.37
निवर्त्यमानो रामेण सुमन्त्रः शोक कर्शितः ।तत् सर्वम् वचनम् श्रुत्वा स्नेहात् काकुत्स्थम् अब्रवीत्॥
nivartyamāno rāmeṇa sumantraḥ śoka karśitaḥ |tat sarvam vacanam śrutvā snehāt kākutstham abravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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