वाल्मीकि रामायण 2.52.47
मम तावन् नियोगस्थाः त्वद् बन्धु जन वाहिनः ।कथम् रथम् त्वया हीनम् प्रवक्ष्यन्ति हय उत्तमाः॥
mama tāvan niyogasthāḥ tvad bandhu jana vāhinaḥ |katham ratham tvayā hīnam pravakṣyanti haya uttamāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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