वाल्मीकि रामायण 2.53.29
ध्रुवम् अद्य पुरी रामायोध्या युधिनाम् वर ।निष्प्रभा त्वयि निष्क्रान्ते गत चन्द्रा इव शर्वरी॥
dhruvam adya purī rāmāyodhyā yudhinām vara |niṣprabhā tvayi niṣkrānte gata candrā iva śarvarī ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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