वाल्मीकि रामायण 2.54.13
न्यवेदयत च आत्मानम् तस्मै लक्ष्मण पूर्वजः ।पुत्रौ दशरथस्य आवाम् भगवन् राम लक्ष्मणौ॥
nyavedayata ca ātmānam tasmai lakṣmaṇa pūrvajaḥ |putrau daśarathasya āvām bhagavan rāma lakṣmaṇau ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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