वाल्मीकि रामायण 2.54.16
पित्रा नियुक्ता भगवन् प्रवेष्यामः तपो वनम् ।धर्मम् एव आचरिष्यामः तत्र मूल फल अशनाः॥
pitrā niyuktā bhagavan praveṣyāmaḥ tapo vanam |dharmam eva ācariṣyāmaḥ tatra mūla phala aśanāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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