वाल्मीकि रामायण 2.54.21
चिरस्य खलु काकुत्स्थ पश्यामि त्वाम् इह आगतम् ।श्रुतम् तव मया च इदम् विवासनम् अकारणम्॥
cirasya khalu kākutstha paśyāmi tvām iha āgatam |śrutam tava mayā ca idam vivāsanam akāraṇam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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